इस्लामाबाद: पाकिस्तान के शिकंजे से बलूचिस्तान फिसलने लगा है। बलूचिस्तान में मौजूदा हालात काफी खतरनाक हो गये हैं। बलूचिस्तान के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना विद्रोह को कुचलने के लिए क्रूरता और हैवानियत पर उतर आई है। छोटे छोटे बच्चों को पाकिस्तानी सेना गोली मारकर हत्या कर रही है।
बलूचिस्तान की सबसे बड़ी नेता माने जाने वाली महरंग बलूच को पाकिस्तानी फौज ने अगवा कर लिया है। उनके साथ कई महिला नेताओं को अगवा कर लिया गया है और उनकी रिहाई की मांग को लेकर बलूचिस्तान के दर्जनों शहर में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच बलूचिस्तान के तुर्बत शहर पर बलूच विद्रोहियों का कब्जा हो गया है। तुर्बत के अलावा भी कुछ और शहरों पर बलूच विद्रोहियों के कब्जे की खबर है। कई हाईवे को बलूच विद्रोहियों ने बंद कर दिया है।
हालात काफी खतरनाक हो चुके हैं और ऐसा लग रहा है कि बलूच फ्रीडम फाइटर्स, पाकिस्तान से आजादी हासिल करके ही दम लेंगे। बलूचिस्तान से आ रही ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार से विद्रोहियों के दो अलग-अलग भीषण हमलों में कम से कम आठ लोग मारे गए हैं और 17 लोग घायल हुए हैं। मारे जाने वाले ज्यादातर लोग पाकिस्तानी सेना के जवान और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लोग हैं।
बलूच विद्रोही चुन-चुनकर पाकिस्तानी पंजाब के लोगों को मार रहे हैं। हालात ये हो गये हैं कि पंजाब के लोग बलूचिस्तान से भाग रहे हैं। दूसरी तरफ गुरुवार को बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के बारेच मार्केट इलाके में एक पुलिस वाहन को धमाके में उड़ा दिया गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले बुधवार की रात को बलूच विद्रोहियों ने ग्वादर जिले में एक यात्री बस से पंजाब के रहने वाले 6 लोगों को उतारकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा बलूच विद्रोहियों ने पंजाब के रहने वाले 3 लोगों को अगवा भी कर लिया है।
इस बीच बलूचिस्तान के लोग भारत से मदद की मांग कर रहे हैं। बलूचिस्तान के कई बलूच नेता लगातार भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं। बलूचिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने वाले पाकिस्तानी मूल के कनाडाई पत्रकार ताहिर असलम गोरा ने कहा है कि तुर्बत शहर पर बलूच विद्रोहियों का कब्जा हो गया है।
उन्होंने कहा कि तुर्बत पर ‘सरबचारी’ का कब्जा हो गया है। आपको बता दें कि ‘सरबचारी’ बलूच विद्रोहियों को कहा जाता है। The Bolan News ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि “बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले सशस्त्र समूहों का एक संगठन, बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) ने पाकिस्तानी सेना, उनके सहायक बलों और बलूचिस्तान में खनिज संसाधनों को ले जाने वाले गाड़ियों पर एक साथ 48 हमले किए हैं।” वहीं ग्वादर के पिसनी शहर में भी कई धमाके किए गये हैं, जहां चीन अपना सीपीईसी प्रोजेक्ट चला रहा है।
इसके अलावा तुर्बत शहर में आने जाने के रास्तों को बंद कर दिया गया है। सिर्फ बलूच लोग ही शहर में आज सकते हैं। बलूच विद्रोही लोगों के आईडी कार्ड की जांच करने के बाद ही आने जाने की इजाजत दे रहे हैं। शहर से पाकिस्तानी सेना के जवानों को बाहर भगा दिया गया है। इसके अलावा कराची शहर को बलूचिस्तान की राजधानी से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे मश्तून पर भी बलूच विद्रोहियों का कब्जा हो गया है।
हाईवे की नाकेबंदी कर दी गई है। ताहिर असलम गोरा ने कहा है कि बलूचिस्तान के हालात काफी खराब हो चुके हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान की आजादी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों को बेदर्दी से गिरफ्तार किया जा रहा है। उनके खिलाफ क्रूर कार्रवाई की जा रही है।
ताहिर असलम गोरा ने अपने वीडियो में कहा है कि पाकिस्तान भारत पर बलूचिस्तान में अशांति का आरोप लगा रहा है, जबकि बलूचों का कहना है कि उन्हें भारत से कोई मदद नहीं मिल रही है। ताहिर असलम गोरा ने भारत से बलूचों की मदद का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि बलूचिस्तान के लोग बांग्लादेशियों की तरह अहसानफरामोश नहीं हैं। उन्होंने कहा है हजारों लोग आजादी के लिए अपनी गलियों, मोहल्लों और जिलों में बाहर निकल चुके हैं।
ताहिर असलम गोरा ने कहा है कि पाकिस्तान के भी कई लोग अब बलूचों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के जुल्म के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान की पार्टी के खिलाफ भी पाकिस्तानी सेना ने ऐसा ही जुल्म किया था। इसके अलावा उन्होंने आह्वान किया है कि जिन इलाकों में बलूचों ने कब्जा कर लिया है, वहां पर पाकिस्तानी सेना को हमला नहीं करना चाहिए।
वहीं पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान के स्कूलों से पाकिस्तान के झंडे हटा लिए गये हैं। जिसके बाद बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने स्कूलों को पाकिस्तान का झंडा फिर से लगाने के आदेश जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों को धमकी दी गई है कि अगर फिर से पाकिस्तानी झंडे नहीं लगाए गये तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन ज्यादातर स्कूलों ने फैसला मानने से इनकार कर दिया है।